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हर्ष फायरिंग केस में भाजपा विधायक राजू कुमार सिंह दोषी, 2018 की घटना में डॉक्टर की मौत, आज सजा पर फैसला

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दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने भाजपा विधायक राजू कुमार सिंह को हर्ष फायरिंग केस में दोषी करार दिया है। 2018 की घटना में डॉक्टर अर्चना गुप्ता की मौत हुई थी, आज सजा सुनाई जाएगी।

पटना/आलम की खबर: बिहार और दिल्ली की राजनीति से जुड़ा एक बड़ा और चर्चित मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। भारतीय जनता पार्टी के विधायक और मुजफ्फरपुर जिले की साहिबगंज विधानसभा सीट से चार बार के विधायक राजू कुमार सिंह को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने हर्ष फायरिंग मामले में दोषी करार दिया है। यह फैसला उस पुरानी घटना से जुड़ा है जिसने एक परिवार की जिंदगी हमेशा के लिए बदल दी थी।

अदालत ने 6 जून को सुनवाई के दौरान उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर विधायक को गैर-इरादतन हत्या (IPC 304 Part 2) और आर्म्स एक्ट के तहत दोषी ठहराया। अब 9 जून को इस मामले में सजा को लेकर अंतिम बहस होनी है, जिसके बाद अदालत यह तय करेगी कि उन्हें कितनी सजा दी जाएगी। फैसले के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजे जाने का आदेश भी दिया गया है, जिससे मामला और अधिक गंभीर हो गया है।

यह पूरी घटना 31 दिसंबर 2018 की रात की है, जब दक्षिण दिल्ली के फतेहपुर बेरी क्षेत्र में स्थित एक फार्महाउस में नए साल के जश्न के लिए बड़ी पार्टी आयोजित की गई थी। पार्टी में भारी भीड़ मौजूद थी और माहौल पूरी तरह उत्सव जैसा था। लोग डांस और संगीत का आनंद ले रहे थे, लेकिन इसी बीच अचानक हुई एक घटना ने पूरे जश्न को मातम में बदल दिया।

आरोपों के अनुसार, इसी पार्टी के दौरान विधायक राजू कुमार सिंह ने अपनी लाइसेंसी पिस्तौल से हवा में फायरिंग शुरू कर दी। भीड़भाड़ वाले माहौल में चली गोली अनियंत्रित होकर वहां मौजूद 45 वर्षीय महिला डॉक्टर अर्चना गुप्ता के सिर में जा लगी। गोली लगते ही वह गंभीर रूप से घायल होकर गिर पड़ीं और उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान 3 जनवरी 2019 को उनकी मौत हो गई।

इस घटना के बाद मृतका के पति की शिकायत पर दिल्ली पुलिस ने मामला दर्ज किया और लंबी जांच शुरू की। अदालत में पेश किए गए वैज्ञानिक साक्ष्य और गवाहों के बयान के आधार पर यह साबित हुआ कि यह घटना महज दुर्घटना नहीं थी, बल्कि गंभीर लापरवाही का परिणाम थी। अदालत ने साफ कहा कि भीड़भाड़ वाली जगह पर हथियार से फायरिंग करना गैर-जिम्मेदाराना और खतरनाक कृत्य है।

इस मामले में विधायक के साथ उनकी पत्नी और कुछ अन्य लोगों को भी आरोपी बनाया गया था, जिन पर सबूत मिटाने के आरोप लगे थे। हालांकि अदालत ने सुनवाई के बाद पाया कि उनके खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं हैं, जिसके चलते सभी सह-आरोपियों को बरी कर दिया गया।

कानूनी जानकारों के मुताबिक IPC 304 Part 2 के तहत दोषी पाए जाने पर अधिकतम 7 साल तक की सजा हो सकती है, जिसमें जुर्माना या दोनों शामिल हैं। अब सबकी नजर अदालत के आज के फैसले पर टिकी है, क्योंकि यही तय करेगा कि विधायक को कितनी सजा मिलेगी।

यदि उन्हें 2 साल या उससे अधिक की सजा होती है, तो उनकी विधानसभा सदस्यता पर भी सीधा असर पड़ सकता है और साहिबगंज सीट खाली घोषित की जा सकती है। यही कारण है कि यह मामला राजनीतिक रूप से भी बेहद महत्वपूर्ण बन गया है।

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